चारधाम यात्रा के लिए बाहरी राज्यों को स्वास्थ्य विभाग ने भेजी SOP ।

देहरादून- चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। इसके साथ ही हेली सेवाओं की बुकिंग के लिए भी तारीख निर्धारित कर ली गई है। इस बार चारधाम यात्रा में पहली बार चार्टर्ड सेवा की सुविधा भी दी जा रही है। आपको बता दे कि हेली सेवा की बुंकिग 20 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। पहली बार चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को चार्टर्ड सेवा की सुविधा भी दी जा रही है। बता दें कि इस बार चारधाम हेलीसेवा के किराए में पांच फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इस बार भी हेली सेवा के लिए बुकिंग आईआरसीटीसी से ही की जाएगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य विेभाग ने सभी बाहरी राज्यों को SOP(एसओपी) कर दिया है नौ भाषाओं में SOP को जारी किया गया।

हिंदी, अंग्रेजी के साथ गुजराती, मराठी, तेलगू जिसमें यात्रा शुरू करने से पहले यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देश दिए गए। चारधाम यात्रा के लिए पर्यटन विभाग ने पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने तीर्थ यात्रियों की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दीं हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम उच्च हिमालयी क्षेत्र में है। जिनकी ऊंचाई समुद्र तल से 2700 मीटर अधिक है। यात्रा के लिए गरम कपड़े, बारिश से बचाव के लिए रेनकोट, छाता, स्वास्थ्य जांच के लिए पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर साथ में रखें। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, अस्थमा, मधुमेह से ग्रसित यात्री जरूरी दवा और डॉक्टर का नंबर अपने पास रखें। यात्रा के दौरान सीने में दर्द, सांस की तकलीफ, चक्कर आना, उल्टी आने पर नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या मेडिकल रिलीफ में प्राथमिक उपचार लें।

इन क्षेत्रों में ठंड, कम आर्द्रता, अल्ट्रा वाइलेट रेडिएशन, हवा का कम दबाव से ऑक्सीजन की कमी के चलते स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग ने एसओपी में यात्रियों को सलाह दी कि कम से कम सात दिन के लिए चारधाम यात्रा की योजना बनाएं। केदारनाथ और यमुनोत्री धाम में पैदल चढ़ते समय प्रत्येक एक से दो घंटे के बाद 5 से 10 मिनट तक विश्राम करें। सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि चारधाम यात्रा के लिए एसओपी 11 भाषाओं में तैयार की गई है। इसमें हिंदी, अंग्रेजी के साथ नौ स्थानीय भाषाएं शामिल हैं। बाहरी राज्यों को एसओपी भेज दी गई है। जिससे दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं अपनी भाषाओं में स्वास्थ्य संबंधित दिशा-निदर्शों का पालन कर सकें।

uttarakhandtime
Author: uttarakhandtime