लैंड फ्रॉड पर प्रशासन का कड़ा प्रहार

लैंड फ्रॉड

देहरादून | उत्तराखंड में जमीन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए शासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। गढ़वाल मंडलायुक्त विनय शंकर पाण्डेय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का खाका तैयार किया गया। मंडलायुक्त ने विभिन्न जिलों से आए 104 प्रकरणों की गहन जांच के बाद 24 गंभीर मामलों में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

देहरादून, हरिद्वार और टिहरी में सबसे ज्यादा मामले

आयुक्त कार्यालय में हुई इस अहम बैठक में सामने आया कि जमीन धोखाधड़ी के सबसे ज्यादा मामले देहरादून, हरिद्वार और टिहरी गढ़वाल जिलों से जुड़े हैं। बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि पीड़ितों को हर हाल में न्याय दिलाया जाए और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।

जांच में 104 प्रकरणों का हुआ निस्तारण

मंडल आयुक्त ने बताया कि कुल 104 मामलों की समीक्षा की गई, जिनका विवरण इस प्रकार है:

  • 24 मामले: प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी पाए जाने पर FIR के आदेश।

  • 45 मामले: लैंड फ्रॉड की श्रेणी से बाहर रखे गए।

  • समझौता: कई मामलों में आपसी सहमति के बाद नाम सूची से हटाए गए।

  • रकम वापसी: कुछ प्रकरणों में पुलिस की मौजूदगी में पीड़ितों को उनके पैसे वापस दिलाए गए।

  • विवाद: शेष मामले कोर्ट में विचाराधीन या पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े पाए गए।

हर 15 दिन में होगी समीक्षा

प्रशासन ने भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए हर 15 दिन में समीक्षा बैठक करने का निर्णय लिया है। हालांकि, पिछले दिनों वीआईपी कार्यक्रमों की व्यस्तता के कारण यह बैठक 28 दिन बाद हुई, लेकिन कमिश्नर ने साफ किया कि अब इसमें देरी नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि सरकार के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

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Author: uttarakhandtime

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