देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति से जुड़े पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद रावत को लेकर एक शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता हरिओम सहगल ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को प्रार्थना पत्र सौंपकर सोनिया आनंद रावत उर्फ जसबीर कौर आनंद और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, चेक बाउंस, संपत्ति विवाद और अन्य गंभीर आरोपों की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2021 में देहरादून के 111, बुद्धबाजार मोहल्ले स्थित एक भवन को लेकर विक्रय पत्रों के माध्यम से करीब 21 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था। शिकायत में विभिन्न बैंक चेकों के माध्यम से भुगतान किए जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसे पूरी धनराशि प्राप्त नहीं हुई और बाद में भुगतान से जुड़े चेक भी बाउंस हो गए।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संपत्ति और धनराशि को लेकर विवाद बढ़ने के बाद शिकायतकर्ता को कानूनी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा। शिकायतकर्ता ने महाराष्ट्र के नासिक में दर्ज एक मामले तथा देहरादून में संपत्ति से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया है।
पूर्व मंत्री पर दबाव बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के राजनीतिक प्रभाव के चलते उस पर दबाव बनाया गया। उसका दावा है कि संपत्ति पर कब्जे और धमकी देने जैसी परिस्थितियां भी सामने आईं। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
बैंक खातों और संपत्तियों की जांच की मांग
प्रार्थना पत्र में सोनिया आनंद रावत के नाम से कथित तौर पर संचालित विभिन्न बैंक खातों, संपत्तियों और दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने संबंधित मामलों में दर्ज मुकदमों और न्यायालय में चल रही कार्यवाही का भी उल्लेख किया है।
शिकायतकर्ता ने एसएसपी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कथित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा संभव
पूर्व मंत्री का नाम सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज शिकायतकर्ता की ओर से दिया गया प्रार्थना पत्र है। इसमें लगाए गए आरोपों पर पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद रावत का पक्ष उपलब्ध नहीं है। पुलिस की ओर से शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई है, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।



