देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का एक बेहद भावुक और संवेदनशील रूप देखने को मिला है। विरोधियों द्वारा लगातार किए जा रहे व्यक्तिगत हमलों और आरोपों से आहत गोदियाल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए राजनीति के गिरते स्तर पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मर्यादा और सुचिता की सीमाएं नहीं लांघी जानी चाहिए।
संवेदनशीलता पर पहुंचा आघात
मीडिया से बातचीत के दौरान गणेश गोदियाल काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “मैं स्वभाव से एक संवेदनशील व्यक्ति हूं। सार्वजनिक जीवन में आलोचनाएं स्वीकार्य हैं, लेकिन जब प्रहार व्यक्तिगत और चरित्र पर होने लगें, तो वह असहनीय हो जाता है। इन आरोपों ने मुझे भीतर तक आहत किया है।”
राजनीति में सुचिता की अपील
गोदियाल ने अफसोस जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन उन्हें राजनीति में इस तरह के व्यक्तिगत और निचले स्तर के आरोपों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जिस तरह राजनीति में मर्यादाएं टूट रही हैं, वह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
इस्तीफे की चर्चा और पीड़ा
पार्टी के भीतर और बाहर चल रही खींचतान की ओर इशारा करते हुए गोदियाल ने भावुक स्वर में कहा कि यदि किसी को लगता है कि उनसे बेहतर कोई विकल्प है, तो वह सहर्ष पद छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन साजिशों के जरिए छवि खराब करना उचित नहीं है। उन्होंने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे राजनीति में उच्च आदर्शों को बनाए रखें।

