लेटेस्ट न्यूज़
निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर हरिद्वार की सड़कों पर उतरी कांग्रेस: शैलजा का सरकार पर तीखा हमला, हरदा के सवाल पर कहा— ‘यह पार्टी का अंदरूनी मामला’ | JCB से फूलों की बारिश, नारों की गूंज: रामनगर में हरीश रावत का भव्य स्वागत | Haridwar : हरिद्वार कुंभ मेला 2027: स्वच्छता को लेकर तैयारियां तेज, 32 सेक्टरों में तैनात होंगे 13 हजार से अधिक टॉयलेट और हाईटेक सफाई तंत्र | पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों को मिलेगा ज्यादा वेतन, धामी कैबिनेट में मानदेय में बढ़ोतरी को मंजूरी | रुड़की: खानपुर में चेकिंग के दौरान पुलिस और बदमाश के बीच मुठभेड़, आरोपी के पैर में लगी गोली | देहरादून में अवैध सिम बॉक्स कॉल सेंटर का बड़ा भंडाफोड़, एसटीएफ और दूरसंचार विभाग की संयुक्त कार्रवाई |
300x250 (Top)

समुद्र से लेकर जंगलों-पहाड़ों तक ट्रेनिंग में तपकर कुंदन बनते हैं IFS अफसरों ।

देहरादून- प्रोफेसर राजकुमार वाजपेयी ने बताया कि उनकी शैक्षिक संस्था में ट्रेनिंग का अहम हिस्सा क्लब भी होते हैं। जो छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में रुचि और नौकरी के अनुसार निर्देशित करते हैं। इन क्लबों में प्रशिक्षणार्थी लेटरेरी के अंतर्गत लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं। जिससे उनकी साहित्यिक क्षमताएं विकसित होती हैं। नेचर एंड सस्टेनेबिलिटी क्लब में छात्र वातावरण संरक्षण के महत्व को समझते हैं और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए कदम उठाते हैं। इसके अलावा, इस क्लब ने बर्ड वाचिंग को एक महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में स्वीकार किया है।

जिससे छात्र पक्षियों की बोली सुनकर उनके व्यवहार का अध्ययन करते हैं और प्राकृतिक जीवन की समझ में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त, एडवेंचर क्लब में छात्रों के लिए कई रोमांचक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जो उनके दिल को जीने के लिए प्रेरित करती हैं। इन सभी क्लबों के माध्यम से, छात्रों को अपनी रूचियों के अनुसार विकसित करने और उनकी व्यक्तित्व विकसित करने का मौका मिलता है।

इन सारी गतिविधियों के अलावा, प्रोफेसर वाजपेयी ने बताया कि उनकी संस्था एनजीओ के साथ भी सहयोग कर रही है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं में भाग लिया जा रहा है। प्रोफेसर राजकुमार वाजपेयी ने बताया कि उनकी शैक्षिक संस्था में ट्रेनिंग का अहम हिस्सा क्लब भी होते हैं।

जो छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में रुचि और नौकरी के अनुसार निर्देशित करते हैं। इन क्लबों में प्रशिक्षणार्थी लेटरेरी के अंतर्गत लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं, जिससे उनकी साहित्यिक क्षमताएं विकसित होती हैं।

दूसरी ओर 16.5 महीने की ट्रेनिंग में पढ़ाए जाने वाले 25 विषयों में जीव-जंगल की चुनौतियों से निपटने और इनके संरक्षण की तकनीकी और बारीकियां सीखने का मौका मिलता है। आईएफएस की ट्रेनिंग दो साल की होती है। इसमें साढ़े तीन महीने का फाउंडेशन कोर्स पूरा होने के बाद 16.5 महीने की प्रोफेशनल ट्रेनिंग देहरादून स्थित आईजीएनएफए में होती है। इसके बाद चार महीने की फील्ड में ऑन द जॉब ट्रेनिंग होती है।

uttarakhandtime
Author: uttarakhandtime