उत्तरकाशी में 5 दिन पहले ट्रेकिंग पर गई एमबीए छात्रा के मामले में उसके दो साथियों पर अपहरण का केस किया गया है। पुलिस को महिला ट्रेकर के साथ अनहोनी की आशंका है।
उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में ट्रेकिंग पर गई महिला ट्रेकर का 5 दिन बाद भी कोई पता नहीं चल पाया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें महिला की लगातार तलाश कर रही हैं। इस बीच मामले में उसके दो पुरुष साथियों के खिलाफ अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच में पर्यटन विभाग के पोर्टल पर दर्ज युवती और उसके साथियों की जानकारी में भी गड़बड़ी सामने आई है।
बीते शुक्रवार को एक महिला और दो पुरुषों का समूह ट्रेकिंग के लिए दयारा बुग्याल गया था। बताया गया कि तीनों गोई में रात को रुके थे और वहीं से युवती लापता हो गई। साथी ट्रेकर्स ने शनिवार को इसकी सूचना वन विभाग को दी थी, जिसके बाद खोज अभियान शुरू किया गया। रविवार को जब तीनों ट्रेकर्स का रिकॉर्ड देखा गया तो उनकी जानकारी में भी बदलाव किए जाने की बात सामने आई।
सूचना मिलने पर पहुंचे युवती के परिजनों ने सीसीटीवी फुटेज में उसकी पहचान की। एसपी कमलेश उपाध्याय ने बताया कि युवती की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक की जांच के आधार पर लापता ट्रेकर के साथियों हरमनप्रीत सिंह और हरमनपाल सिंह के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया है।
रिकॉर्ड की जांच में सामने आई गड़बड़ी
उत्तरकाशी रविवार को जब ट्रेकिंग पर गए तीनों लोगों का रिकॉर्ड जांचा गया तो स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसी संचालक की ओर से की गई गड़बड़ी सामने आई। पोर्टल पर हरमनपाल सिंह और लापता नैनीताल निवासी बबीता पांडे का नाम और पता अलग-अलग दर्ज पाया गया।
पोर्टल के बाहरी पेज पर लापता युवती का नाम बबीता पांडे, उम्र 30 वर्ष, निवासी नैनीताल दिखाया गया है, जबकि अपलोड किए गए आधार कार्ड में नाम आराधना द्विवेदी है। दूसरे साथी का नाम भी हरमनपाल सिंह और पता श्रीनगर दर्ज है, जबकि अपलोड दस्तावेज में नाम अनंत रंजन और पता बिहार का है। वहीं फिटनेस प्रमाण पत्र भी 12 दिसंबर 2025 का दिखाया गया है।
बिना दस्तावेजों की सही जांच किए ट्रेकिंग की अनुमति दे दी गई। जिला पर्यटन विकास अधिकारी केके जोशी ने बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम के तहत “एक्सप्लोर उत्तरकाशी” नाम से नया पोर्टल बनाया गया है, जिसमें ट्रेकिंग के लिए आवेदन करना होता है। दस्तावेज अपलोड कर और निर्धारित शुल्क जमा करते ही अनुमति पत्र अपने आप जारी हो जाता है। ट्रेकिंग एजेंसी द्वारा वन विभाग को दिए गए पत्र में कुछ ट्रेकर्स के नाम बदले जाने की बात भी सामने आई है।



