हरिद्वार में आगामी कांवड़ यात्रा और भविष्य के कुम्भ मेला की तैयारियों के बीच जिला प्रशासन ने रेलवे की भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। रेलवे लाइन के समीप स्थित करीब 10 बीघा भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए रेलवे, जिला प्रशासन, पुलिस और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर 50 से अधिक अवैध झुग्गी-झोपड़ियों को ध्वस्त कर दिया
मंगलवार 23 जून की सुबह करीब 10 बजे हरी गिरी के नेतृत्व में संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। अभियान में सीओ सदर एसपी बलूनी, रेलवे अधिकारियों, स्थानीय पुलिस और रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स (RPF) के जवान भी शामिल थे।प्रशासन के अनुसार, अतिक्रमणकारियों को पहले ही कई नोटिस जारी किए जा चुके थे। इसके बावजूद भूमि खाली नहीं की गई। कार्रवाई शुरू करने से पहले भी झुग्गियों में रहने वाले लोगों को अपना सामान हटाने के लिए लगभग दो घंटे का अतिरिक्त समय दिया गया।
विरोध और नोकझोंक के बीच चला बुलडोजर
निर्धारित समय पूरा होने के बाद जेसीबी मशीनों की मदद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। कुछ लोगों ने विरोध जताया और अधिकारियों के साथ हल्की नोकझोंक भी हुई, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी के चलते स्थिति नियंत्रण में रही।कार्रवाई के दौरान रानीपुर पुलिस स्टेशन ,कनखल पुलिस स्टेशन, ज्वालापुर पुलिस स्टेशन की पुलिस टीमों के साथ आरपीएफ के जवान भी तैनात रहे।
झुग्गियों में मिले बिजली कनेक्शन और घरेलू उपकरण
अभियान के दौरान प्रशासनिक टीम को कई झुग्गियों के भीतर बिजली की तारें, कूलर, पंखे और अन्य घरेलू उपयोग का सामान मिला। स्थानीय लोगों का दावा था कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे थे और उनके वोटर कार्ड भी बने हुए हैं। हालांकि जब अधिकारियों ने पहचान संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा तो अधिकांश लोग कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। प्रशासन अब यह भी जांच सकता है कि रेलवे भूमि पर बने इन अस्थायी ढांचों तक बिजली जैसी सुविधाएं कैसे पहुंचीं और क्या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई।
झुग्गी गिरने से दबे कर्मचारी
अतिक्रमण हटाने के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही जेसीबी मशीन ने एक झुग्गी को हटाने की कार्रवाई शुरू की, पूरी झोपड़ी अचानक भरभराकर गिर गई। इसके नीचे तीन से चार पुलिसकर्मी और रेलवे कर्मचारी दब गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि झुग्गियां मुख्य रूप से बांस और हल्के निर्माण सामग्री से बनी थीं। वजन कम होने के कारण कर्मचारियों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया और किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली। कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन बाद में अभियान फिर शुरू कर दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि रेलवे की भूमि पर अवैध कब्जा सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।और रेलवे ट्रैक के आसपास बस्तियां दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाती हैं।और आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है साथ ही यातायात और सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुचारु रखने के लिए अतिक्रमण हटाना आवश्यक था।



