उत्तराखंड की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। बीजेपी और निर्दलीय पृष्ठभूमि से जुड़े 5 से 6 नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से प्रदेश की सियासत गरमा गई है। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मान रहे हैं।
कांग्रेस की ताकत बढ़ाने की रणनीति
माना जा रहा है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी संगठनात्मक ताकत मजबूत करने में जुटी है। विभिन्न दलों और निर्दलीय नेताओं को पार्टी में शामिल कर कांग्रेस प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
प्रदीप बत्रा ने दी प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि राजनीति में आना-जाना लगा रहता है। उन्होंने कहा,
“सभी आना-जाना चलता रहता है, जिसे जहां मन कर रहा है, वहां जा रहा है। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए हमारा लक्ष्य निर्धारित है।”
धामी के नेतृत्व में सरकार बनने का दावा
मंत्री बत्रा ने विश्वास जताते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सरकार बनाएगी। उनका कहना है कि बीजेपी अपने चुनावी लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित है और पार्टी को जनता का पूरा समर्थन मिलेगा।
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प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल
नेताओं के दल बदलने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे 2027 चुनाव से पहले संभावित समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।



