उत्तराखंड की बेटी प्रेमा रावत का भारतीय टीम में चयन, गांव से लेकर विश्व कप तक का शानदार सफर

Prema Rawat

उत्तराखंड:  के लिए गर्व का क्षण है कि 24 वर्षीय प्रतिभाशाली स्पिनर  प्रेमा रावत  का भारतीय महिला क्रिकेट टीम में चयन हो गया है। घरेलू क्रिकेट में उत्तराखंड महिला टीम का लगातार प्रतिनिधित्व करने वाली प्रेमा अब भारतीय टीम की ओर से विश्व कप में अपनी फिरकी का जादू बिखेरने के लिए तैयार हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे उत्तराखंड क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। प्रेमा के चयन की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। इन दिनों छुट्टियां मनाने गांव पहुंचे उनके परिवार को ग्रामीणों ने मिठाइयां खिलाकर बधाई दी। ग्राम प्रधान विमला देवी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रेमा की मां बसंती देवी, भाई विमल रावत, दादी हरूली देवी और बुआ चंद्रा देवी को सम्मानित करते हुए इस उपलब्धि को पूरे गांव का गौरव बताया।

गांव की बेटी से टीम इंडिया तक का सफर 

प्रेमा रावत उत्तराखंड की उभरती हुई महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाई है। प्रेमा रावत का जन्म  12 नवंबर 2001 को सुमती-बैसानी गांव ,कपकोट क्षेत्र, बागेश्वर जिला में हुआ था। प्रेमा रावत ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से कक्षा दो तक प्राप्त की। इसके बाद उनका परिवार बेहतर शिक्षा और खेल के अवसरों के लिए बरेली चला गया। वहीं अपने भाइयों के साथ गली-मोहल्लों में क्रिकेट खेलते हुए उन्होंने इस खेल की बुनियादी सीख हासिल की। धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा बड़े मैदानों तक पहुंची और उन्होंने उत्तराखंड की अंडर-19, अंडर-23 और सीनियर महिला टीम का प्रतिनिधित्व किया। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर प्रेमा को महिला प्रीमियर लीग (WPL) में खेलने का मौका मिला, जहां उन्होंने अपनी गेंदबाजी से चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय महिला टीम में जगह मिली, जो उनके लंबे संघर्ष और मेहनत का परिणाम है।

क्रिकेट के साथ गांव की संस्कृति से भी जुड़ी हैं प्रेमा 

प्रेमा की मां बसंती देवी बताती हैं कि बेटी ने बचपन से ही क्रिकेटर बनने का सपना देखा था और उसे पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की। क्रिकेट में पहचान बनाने के बावजूद प्रेमा आज भी अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। गांव आने पर वह घास काटना, खेतों में निराई-गुड़ाई करना और मवेशियों की देखभाल जैसे पारंपरिक काम भी पूरे मन से करती हैं। प्रेमा के छोटे भाई विमल रावत के अनुसार परिवार ने कभी भी बेटी के क्रिकेट खेलने पर सवाल उठाने वालों की परवाह नहीं की। माता-पिता और दादा-दादी ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। बरेली की भीषण गर्मी में भी प्रेमा घंटों मैदान पर अभ्यास करती थीं। गांव आने पर भी वह मालूखेत मिनी स्टेडियम में स्थानीय खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करना नहीं छोड़तीं।प्रेमा के पिता केदार सिंह रावत भारतीय वायुसेना में कार्यरत हैं और वर्तमान में असम में तैनात हैं। बड़े भाई हिमांशु रावत बेंगलुरु में नौकरी करते हैं, जबकि छोटे भाई विमल अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।

प्रेमा रावत का भारतीय टीम में चयन उत्तराखंड के उभरते क्रिकेट ढांचे के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। इससे राज्य की युवा महिला खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेमा की स्पिन गेंदबाजी भारतीय टीम के लिए विश्व कप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

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Author: uttarakhandtime

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