रुद्रप्रयाग: द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर यात्रा मार्ग पर सोमवार को गौण्डार गांव के पास एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मोरखंडा नदी पर बना अस्थायी लकड़ी का पुल बह जाने के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही ट्रॉली के माध्यम से कराई जा रही है। इसी दौरान ट्रॉली में बैठने की तैयारी कर रहा एक तीर्थयात्री अचानक संतुलन खो बैठा और नदी में गिर गया। मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों, यात्रियों और बचाव में जुटे लोगों ने तत्काल नदी में उतरकर तीर्थयात्री का रेस्क्यू किया। घायल अवस्था में उसे सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
पुल बहने के बाद ट्रॉली बनी एकमात्र सहारा
जानकारी के अनुसार हाल ही में मोरखंडा नदी पर बना अस्थायी लकड़ी का पुल तेज बहाव में क्षतिग्रस्त होकर बह गया था। इसके बाद प्रशासन ने अस्थायी रूप से ट्रॉली के जरिए नदी पार कराने की व्यवस्था की है। हालांकि यात्रा सीजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से ट्रॉली के पास लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष अंथवाल ने यात्रा मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पुल बह जाने के बाद भी सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण श्रद्धालुओं को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित पैदल पुल या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि घायल तीर्थयात्री के उपचार के लिए हेली रेस्क्यू की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र भेजा गया है। पहले घायल को रेस्क्यू कर रासी तक लाया जाएगा, जहां से हेलीकॉप्टर के माध्यम से उसे बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने मध्यमहेश्वर यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुल बहने के बाद अस्थायी ट्रॉली व्यवस्था पर पूरी यात्रा निर्भर है, जबकि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मार्ग से गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मार्गों पर स्थायी और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
प्रशासन और यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- मोरखंडा नदी पर बना अस्थायी लकड़ी का पुल बह चुका है।
- वर्तमान में ट्रॉली के माध्यम से नदी पार कराई जा रही है।
- भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है।
- घायल तीर्थयात्री के हेली रेस्क्यू की तैयारी की जा रही है।
- प्रशासन से सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था जल्द उपलब्ध कराने की मांग तेज हो गई है।
नोट: घायल तीर्थयात्री की पहचान और स्वास्थ्य संबंधी आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी होने का इंतजार है। यदि प्रशासन की ओर से नई जानकारी जारी होती है, तो समाचार को उसी के अनुसार अपडेट किया जाएगा।



