उत्तराखंड: मानसून की बारिश के दौरान चारधाम यात्रा मार्गों पर भूस्खलन और भूधंसाव की घटनाएं सामने आईं। सबसे ज्यादा परेशानी गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे पर रही, जहां स्यानाचट्टी, रानाचट्टी, सिलाई बैंड और नालूपानी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मलबा और बोल्डर गिरने से कई बार आवाजाही प्रभावित हुई।
यमुनोत्री हाईवे पर पालीगाड़ से जानकीचट्टी के बीच चौड़ीकरण कार्य के दौरान अनियंत्रित कटान भी परेशानी का कारण बना। वहीं गंगोत्री हाईवे पर धरासू, भटवाड़ी और डबरानी क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील बने रहे।
इसके मुकाबले बदरीनाथ हाईवे पर स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में किए गए उपचार से मार्ग को जल्दी बहाल करने में मदद मिली। क्षेत्रपाल और पागलनाला जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कार्य किए गए, जबकि लामबगड़ में मोटर पुल बनने से भी यातायात सुचारु रखने में मदद मिली।
27 अगस्त को हाथी पहाड़ के पास सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद करीब 8 घंटे में यातायात बहाल कर दिया गया। हाईवे पर मशीनरी और मैनपावर की तैनाती से मलबा हटाने का काम तेजी से हुआ।
हालांकि ज्योतिर्मठ से मारवाड़ी के बीच चौड़ीकरण कार्य पूरा न होने से जाम की समस्या बनी रही। वहीं ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग के तोताघाटी और सिंगटाली क्षेत्रों में इस बार स्थिति अपेक्षाकृत राहतभरी रही।
यानी इस मानसून में गंगोत्री-यमुनोत्री रूट सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा, जबकि बदरीनाथ हाईवे पर सड़क उपचार और त्वरित कार्रवाई से यात्रियों को कुछ राहत मिली।



