हरिद्वार/ऋषिकेश: सावन माह के पहले सोमवार पर धर्मनगरी हरिद्वार और योगनगरी ऋषिकेश शिवभक्ति में सराबोर नजर आए। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। हजारों श्रद्धालुओं ने गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना की।
हरिद्वार के प्रसिद्ध दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी सैलाब देखने को मिला। यह मंदिर हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा दक्ष प्रजापति ने यहीं विशाल यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें भगवान शिव का अपमान हुआ। इसी घटना के बाद माता सती ने योगाग्नि में देह त्याग दी थी। बाद में भगवान शिव के क्रोध से वीरभद्र प्रकट हुए और यज्ञ का विध्वंस हुआ। इस कारण दक्षेश्वर महादेव मंदिर को भगवान शिव और माता सती से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थली माना जाता है। सावन माह में यहां दर्शन और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।
ऋषिकेश के सोमेश्वर महादेव, चंद्रेश्वर महादेव और वीरभद्र महादेव मंदिरों में भी सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। मंदिरों के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का अभिषेक किया। कई श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के दौरान गंगाजल लेकर सीधे मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
सावन का पहला सोमवार भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी वजह से हर वर्ष इस अवसर पर हरिद्वार और ऋषिकेश सहित उत्तराखंड के प्रमुख शिवालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने मंदिर परिसरों तथा प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की। स्वयंसेवकों और मंदिर समितियों ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।



