देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बदलते मौसम और रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच डेंगू संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राज्य, विशेषकर देहरादून जिले में सतर्कता बढ़ा दी है। डेंगू मरीजों के उपचार के लिए 40 सरकारी और निजी अस्पतालों में कुल 1,662 बेड आरक्षित किए गए हैं। इनमें 1,530 सामान्य बेड और 132 आईसीयू बेड शामिल हैं, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मई से अब तक जिले में डेंगू के 50 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। सामान्यतः डेंगू के मामले सितंबर से अधिक संख्या में सामने आने लगते हैं, लेकिन इस वर्ष संक्रमण अपेक्षाकृत पहले दिखाई देने लगा है। इसे देखते हुए विशेषज्ञ संभावित प्रकोप (आउटब्रेक) की आशंका जता रहे हैं।
क्यों बढ़ रहा है डेंगू का खतरा?
जंतु विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय का मौसम एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। रुक-रुककर होने वाली बारिश के कारण जगह-जगह साफ पानी जमा हो जाता है, जबकि बीच-बीच में निकलने वाली धूप और नमी मच्छरों के अंडों के विकास को तेज कर देती है।
डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर मुख्य रूप से साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है। घरों की छतों पर रखी पानी की टंकियां, कूलर, गमलों की तश्तरियां, पुराने टायर, प्लास्टिक के डिब्बे और अन्य खुले बर्तनों में जमा पानी इसके लिए आदर्श प्रजनन स्थल बन जाते हैं। इसलिए विशेषज्ञ सप्ताह में कम से कम एक बार ऐसे सभी स्थानों की सफाई और पानी बदलने की सलाह देते हैं।
अस्पतालों को दिए गए विशेष निर्देश
संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एम्स ऋषिकेश, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय, जिला अस्पताल सहित सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में डेंगू वार्ड, प्रशिक्षित चिकित्सा दल, आवश्यक दवाइयां, जांच सुविधाएं और आपातकालीन उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
इसके साथ ही सभी ब्लड बैंकों को पर्याप्त मात्रा में रक्त और प्लेटलेट्स उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, क्योंकि गंभीर डेंगू मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम हो सकती है और समय पर उपचार आवश्यक होता है।
16 हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष निगरानी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा के अनुसार जिले के 16 क्षेत्रों को डेंगू हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें बंजारावाला, पटेल नगर, क्लेमेंटटाउन, मोथरोवाला, जाखन, मेहूंवाला, लक्खीबाग और माजरा सहित अन्य इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित रूप से घर-घर सर्वे, लार्वा जांच, फॉगिंग, एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव तथा लोगों को जागरूक करने का अभियान चला रही हैं। यदि किसी व्यक्ति में बुखार के लक्षण मिलते हैं तो उसकी तत्काल जांच कराई जा रही है।
जंतु विशेषज्ञों के अनुसार, एडीज मच्छर सामान्यतः जमीन के अपेक्षाकृत निचले स्तर पर सक्रिय रहता है और बहुत लंबी दूरी तक नहीं उड़ता। यही कारण है कि यह अक्सर पैरों और टखनों के आसपास काटता है। हालांकि इसकी उड़ान क्षमता केवल तीन फीट तक सीमित होने का दावा वैज्ञानिक रूप से निश्चित सीमा नहीं माना जाता, क्योंकि परिस्थितियों के अनुसार यह इससे अधिक ऊंचाई और दूरी भी तय कर सकता है। फिर भी यह मच्छर आमतौर पर अपने प्रजनन स्थल के आसपास ही सक्रिय रहता है।
डेंगू के प्रमुख लक्षण
तेज बुखार
सिर और आंखों के पीछे दर्द
शरीर और जोड़ों में तेज दर्द
त्वचा पर लाल चकत्ते
मतली या उल्टी
अत्यधिक कमजोरी
यदि तेज बुखार दो दिन से अधिक बना रहे या रक्तस्राव, सांस लेने में तकलीफ, लगातार उल्टी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें, पूरी बांह के कपड़े पहनें, मच्छरदानी और मच्छररोधी क्रीम का उपयोग करें तथा तेज बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराएं।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें तथा किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। समय पर पहचान और उपचार से डेंगू के गंभीर मामलों से बचा जा सकता है।



