देहरादून। पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को एक बार में 200 लीटर तक ईंधन देने संबंधी नए नियमों की चर्चा के बीच उत्तराखंड सरकार ने राज्य के किसानों, उद्योगों और आवश्यक सेवाओं को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने विशेष परिस्थितियों में 2500 लीटर तक डीजल के सुरक्षित स्टोरेज की अनुमति देने का फैसला किया है। इस निर्णय का उद्देश्य कृषि, निर्माण कार्य, औद्योगिक इकाइयों और आपदा जैसी परिस्थितियों में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सरकार के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में कई बार डीजल की आपूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसे में मशीनों, जनरेटर, सिंचाई पंपों और अन्य आवश्यक उपकरणों के संचालन में परेशानी होती है। इसी को देखते हुए निर्धारित सुरक्षा मानकों के साथ अधिकतम 2500 लीटर तक डीजल स्टोर करने की अनुमति दी गई है।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह छूट सभी के लिए स्वतः लागू नहीं होगी। डीजल का भंडारण केवल तय नियमों, सुरक्षा मानकों और संबंधित विभागों की शर्तों का पालन करने पर ही किया जा सकेगा। ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण स्टोरेज स्थल पर अग्निशमन व्यवस्था, सुरक्षित टैंक और अन्य सुरक्षा उपाय अनिवार्य होंगे।
इधर, पेट्रोल पंपों पर 200 लीटर तक ईंधन आपूर्ति से जुड़े नियमों को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है। सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य ईंधन की सुरक्षा, पारदर्शिता और दुरुपयोग पर रोक लगाना है। वहीं, 2500 लीटर स्टोरेज की अनुमति से कृषि, उद्योग और आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि डीजल स्टोरेज की अनुमति देते समय सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या आगजनी की संभावना को रोका जा सके।


