उत्तराखंड: चंपावत जिले में पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। सीआरपीएफ में तैनात बलदेव कुमार अपनी नई कार में पत्नी, बेटे, बेटी और साले राजेंद्र कुमार के साथ पैतृक गांव डीडीहाट के ननकुड़ी गांव जा रहे थे। रास्ते में वाहन गहरी खाई में गिर गया और उसमें आग लग गई। हादसे में बलदेव कुमार और उनके साले राजेंद्र कुमार की मौत हो गई, जबकि बलदेव की पत्नी नीतू देवी और दोनों बच्चे घायल हो गए।
नई कार लेकर गांव जा रहे थे
मूल रूप से ननकुड़ी गांव, डीडीहाट निवासी बलदेव कुमार सीआरपीएफ के काठगोदाम केंद्र में तैनात थे। परिवार के अनुसार उन्होंने 4 जून को नई कार खरीदी थी। नई कार की पूजा अपने इष्ट देव के मंदिर में करने और परिवार के साथ कुछ दिन गांव में बिताने के उद्देश्य से वे शुक्रवार सुबह लगभग 7 बजे हल्द्वानी से रवाना हुए थे।
कार में बलदेव कुमार, उनकी पत्नी नीतू देवी, बेटा आरव, बेटी अक्षिता और नीतू के बड़े भाई राजेंद्र कुमार सवार थे। वाहन राजेंद्र कुमार चला रहे थे। परिवार खुशी-खुशी गांव की ओर जा रहा था और किसी को अंदाजा नहीं था कि यह यात्रा उनकी जिंदगी की सबसे दर्दनाक घटना बन जाएगी। दोपहर करीब 12:30 बजे चंपावत जिले के बापरू क्षेत्र में वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया। कार सड़क किनारे लगे क्रैश बैरियर को तोड़ते हुए गहरी खाई में जा गिरी। दुर्घटना के तुरंत बाद वाहन में आग लग गई। हादसा इतना भीषण था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। खाई में गिरते समय कार के दरवाजे खुलने और झटकों के कारण कुछ यात्री वाहन से बाहर जा गिरे, जिससे उनकी जान बच गई।
घायल नीतू देवी ने बताया कि दुर्घटना के दौरान सबसे पहले उनका बेटा आरव कार से बाहर छिटक गया। इसके बाद बेटी अक्षिता बाहर निकली और फिर वह स्वयं वाहन से बाहर निकलने में सफल हुईं। लेकिन बलदेव कुमार और राजेंद्र कुमार कार के अंदर ही फंस गआग तेजी से फैल गई और बलदेव कुमार बाहर नहीं निकल सके। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह मदद के लिए आवाज लगाते रहे, लेकिन आग और दुर्घटना की गंभीरता के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनकी जिंदा जलकर मौत हो गई। दूसरी ओर राजेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल होकर वाहन में फंसे रहे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनकी गर्दन की हड्डी टूट गई थी। बचाव दल ने काफी मशक्कत के बाद कटर की सहायता से कार को काटकर दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी।हादसे के बाद नीतू देवी और दोनों बच्चों को उपचार के लिए उप जिला अस्पताल लोहाघाट ले जाया गया।
राजेंद्र कुमार पिथौरागढ़ जिले के अजेड़ा क्षेत्र के निवासी थे। वे मछली पालन का कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में पत्नी सरोज देवी, दो बेटे और दो बेटियां हैं।करीब डेढ़ महीने पहले वे इलाज के लिए चंडीगढ़ पीजीआई गए थे। उपचार के बाद वे अपनी बहन नीतू देवी के घर हल्द्वानी में रह रहे थे। जब बलदेव कुमार ने नई कार से गांव जाने का कार्यक्रम बनाया तो राजेंद्र कुमार भी उनके साथ चल पड़े। उधर अजेड़ा में उनकी पत्नी सरोज देवी पति के घर लौटने का इंतजार कर रही थीं। लेकिन शाम को उन्हें पति की मौत की खबर मिली। खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी सरोज देवी बदहवास हो गईं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
हादसे की सूचना मिलते ही ननकुड़ी गांव, अजेड़ा क्षेत्र और काठगोदाम में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों और रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार गांव में पूजा और पारिवारिक मिलन के लिए आ रहा था, लेकिन रास्ते में हुई इस दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया।एक ओर नीतू देवी ने अपने पति को खो दिया, वहीं दूसरी ओर उनके बड़े भाई की भी मौत हो गई। कुछ ही पलों में एक खुशहाल यात्रा मातम में बदल गई और दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच की जा रही है। वहीं घायलों का उपचार जारी है।



