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उत्तराखंड में हवाई कनेक्टिविटी को मिलेगा नया विस्तार: लैंसडौन, रामनगर और नैनीताल में हेलीकॉप्टर सेवा, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व श्रीनगर में बनेंगे नए हेलीपोर्ट

उत्तराखंड में हवाई कनेक्टिविटी

उत्तराखंड : में हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने और पर्वतीय क्षेत्रों तक तेज, सुरक्षित एवं सुगम परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की नई योजना के तहत राज्य में हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार के लिए व्यापक विमानन अवसंरचना विकसित की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार लैंसडौन, रामनगर और नैनीताल में हेलीकॉप्टर संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, जबकि अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और श्रीनगर में नए हेलीपोर्ट स्थापित किए जाएंगे।

यह निर्णय मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) तथा उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में विमानन अवसंरचना के विस्तार, परिचालन सुरक्षा को मजबूत करने तथा भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा करना था।

उड़ान योजना के तहत मिलेगा नया आयाम

बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार की उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अंतर्गत देशभर में 100 नए हवाई अड्डों तथा 200 नए हेलीपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी अभियान के तहत उत्तराखंड को भी प्राथमिकता दी जा रही है ताकि पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ा जा सके। योजना के तहत प्रस्तावित नए हेलीपोर्ट राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित आवागमन सुनिश्चित करेंगे। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों को लाभ मिलेगा बल्कि पर्यटन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और श्रीनगर में बनेंगे आधुनिक हेलीपोर्ट

बैठक के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष विपिन कुमार ने उत्तराखंड के लिए विमानन विकास का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और श्रीनगर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए हेलीपोर्ट विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इन हेलीपोर्टों के निर्माण से कुमाऊँ और गढ़वाल मंडलों के कई दुर्गम क्षेत्रों तक हवाई पहुंच आसान होगी। साथ ही भविष्य में नियमित हेलीकॉप्टर सेवाओं के संचालन का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

लैंसडौन, रामनगर और नैनीताल में विकसित होगा हेलीकॉप्टर नेटवर्क

राज्य के प्रमुख पर्यटन एवं सामरिक महत्व वाले क्षेत्रों लैंसडौन, रामनगर और नैनीताल में हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए आवश्यक अवसंरचना विकसित की जाएगी। इसके अंतर्गत हेलीपैडों का उन्नयन, यात्री सुविधाएं, संचार प्रणाली, सुरक्षा उपकरण तथा संचालन संबंधी आधुनिक व्यवस्थाएं स्थापित की जाएंगी। इस पहल से पर्यटन स्थलों तक यात्रियों की पहुंच तेज होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। वन्य पर्यटन, धार्मिक पर्यटन तथा एडवेंचर टूरिज्म को भी इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ाई जाएगी उड़ान सुरक्षा

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि पर्वतीय क्षेत्रों में अतिरिक्त मौसम निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी ताकि मौसम संबंधी सटीक और वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध हो सके। इसके अलावा आधुनिक संचार प्रणाली, उन्नत नेविगेशन उपकरण और सुरक्षा प्रोटोकॉल को भी मजबूत किया जाएगा, जिससे खराब मौसम या आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित उड़ान संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

चारधाम हेली सेवा के पहले चरण की सफलता की समीक्षा

बैठक में वर्ष 2026 की चारधाम हेली सेवाओं के पहले चरण की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि पहला चरण 19 अप्रैल से 26 जून 2026 तक सफलतापूर्वक संचालित हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हेलीकॉप्टर सेवाओं का लाभ उठाया और संचालन सुरक्षित एवं व्यवस्थित रहा।

दूसरा चरण 15 सितंबर 2026 से प्रस्तावित है। पहले और दूसरे चरण के बीच के अंतराल का उपयोग सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत करने, तकनीकी सुधार करने तथा आवश्यक अवसंरचना विकसित करने के लिए किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने दिए समयबद्ध कार्यों के निर्देश

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि आगामी चारधाम हेली सेवा शुरू होने से पहले सभी सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं, मौसम निगरानी प्रणाली, हेलीपोर्ट विकास कार्य तथा अन्य आवश्यक अवसंरचनात्मक परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सुरक्षित, विश्वसनीय और आधुनिक विमानन व्यवस्था विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाएगा ताकि यात्रियों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण हवाई सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

पर्यटन, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि नए हेलीपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार से उत्तराखंड में धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। चारधाम यात्रा, कुमाऊँ और गढ़वाल के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।

इसके अतिरिक्त आपदा राहत एवं बचाव अभियानों में भी हेलीकॉप्टर नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एयर एम्बुलेंस सुविधा को मजबूती मिलेगी तथा दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक आपातकालीन सहायता तेजी से पहुंचाई जा सकेगी।
राज्य सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त पहल के तहत प्रस्तावित यह योजना उत्तराखंड की हवाई कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। नए हेलीपोर्ट, आधुनिक हेलीकॉप्टर अवसंरचना, उन्नत सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय संपर्क के विस्तार से उत्तराखंड का विमानन नेटवर्क अधिक मजबूत, सुरक्षित और व्यापक बनेगा। इससे पर्यटन, निवेश, रोजगार, आपदा प्रबंधन तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

 

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Author: uttarakhandtime

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