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मानसून की पहली बारिश में पहाड़ों पर बढ़ी मुश्किलें, उत्तरकाशी में मलबा आने से हाईवे बाधित, राज्यभर में 38 सड़कें बंद

मानसून की पहली बारिश

उत्तराखंड: मानसून की सक्रियता बढ़ते ही पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा आने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। इसका असर चारधाम यात्रा, स्थानीय लोगों और वाहन चालकों पर साफ दिखाई देने लगा है। रविवार देर रात हुई तेज बारिश के बाद उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर मलबा और बोल्डर आने से यातायात प्रभावित रहा। वहीं पूरे राज्य में भूस्खलन के कारण 38 सड़कें बंद होने से जनजीवन प्रभावित हुआ है।

नेताला के पास सड़क बनी कीचड़ में तब्दील

रविवार देर रात हुई बारिश के कारण उत्तरकाशी के नेताला क्षेत्र में भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गया। इससे सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई और कई छोटे चारपहिया तथा दोपहिया वाहन बीच रास्ते में फंस गए। करीब एक घंटे तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने मिलकर किसी तरह फंसे हुए वाहनों को बाहर निकाला, जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका। हालांकि सड़क पर अभी भी कीचड़ और मलबा मौजूद होने के कारण आवाजाही जोखिमभरी बनी हुई है।

डबरानी के पास भी भूस्खलन, आधे घंटे बंद रहा मार्ग

सोमवार सुबह डबरानी क्षेत्र में भी पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने के कारण गंगोत्री हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ। सुरक्षा कारणों से करीब 30 मिनट तक सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। इसके बाद संबंधित विभाग की टीम ने मलबा हटाने का कार्य शुरू किया और मार्ग को आंशिक रूप से यातायात के लिए खोल दिया। प्रशासन ने यात्रियों से सावधानी बरतने और मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है।

चारधाम यात्रियों की बढ़ी परेशानी

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को मानसून के कारण लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने से यात्रा की गति धीमी हो गई है। यात्रियों का कहना है कि बारिश के दौरान पहाड़ी मार्गों पर सफर करना चुनौतीपूर्ण हो गया है और कई स्थानों पर घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

मानसून तैयारियों पर उठे सवाल

मानसून शुरू होने से पहले शासन और प्रशासन की ओर से संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में जेसीबी मशीनें, पुलिस बल और होमगार्ड जवानों की तैनाती के दावे किए गए थे।लेकिन नेताला क्षेत्र में मौके पर न तो कोई मशीन दिखाई दी और न ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी। ऐसे में स्थानीय लोगों ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर मशीनें उपलब्ध होतीं तो सड़क को जल्दी साफ कर यातायात सामान्य किया जा सकता था।

यमुनोत्री हाईवे पर भी जारी है बंद और खुलने का सिलसिला

यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पिछले कई दिनों से बारिश के कारण लगातार मलबा गिर रहा है। इसके चलते हाईवे बार-बार बंद हो रहा है और मलबा हटाने के बाद दोबारा खोला जा रहा है।बारिश जारी रहने से प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

पूरे उत्तराखंड में 38 सड़कें बंद

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, प्रदेश में भूस्खलन के कारण कुल 38 सड़कें बंद हैं। इनमें स्टेट हाईवे, मुख्य जिला मार्ग और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं।

  • पिथौरागढ़: 13 सड़कें बंद
  • देहरादून: 7 सड़कें बंद
  • चमोली: 6 सड़कें बंद
  • बागेश्वर: 5 सड़कें बंद
  • टिहरी गढ़वाल: 5 सड़कें बंद
  • रुद्रप्रयाग: 1 सड़क बंद
  • अल्मोड़ा: 1 सड़क बंद

सड़कें खोलने में जुटी विभागीय टीमें

लोक निर्माण विभाग (PWD), सीमा सड़क संगठन (BRO) और जिला प्रशासन की टीमें बंद मार्गों को खोलने के लिए लगातार राहत एवं बहाली कार्य में जुटी हैं। जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की सहायता से मलबा हटाया जा रहा है ताकि यातायात जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने चारधाम यात्रियों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करें तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आने वाले दिनों में भी कई स्थानों पर भूस्खलन और सड़क बाधित होने की आशंका बनी हुई है।

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Author: uttarakhandtime

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