हरिद्वार। 12 दिन तक चले कांवड़ मेले के संपन्न होने के बाद धर्मनगरी हरिद्वार में सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती सामने है। इस बार कांवड़ मेले में 4.80 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण शहर और जिले के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 7 हजार मीट्रिक टन कूड़ा जमा हुआ है। कचरे की सफाई के लिए जिला प्रशासन ने 12 से 18 अगस्त तक सात दिवसीय विशेष सफाई अभियान शुरू किया है।
सामान्य दिनों में हरिद्वार में प्रतिदिन करीब 250 से 300 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, लेकिन कांवड़ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते कचरे की मात्रा कई गुना बढ़ गई। डाक कांवड़ के अंतिम दो दिनों में ही करीब 1700 मीट्रिक टन कूड़ा सामने आया। प्रशासन का अनुमान है कि मेले के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में फैले कचरे को पूरी तरह हटाने में करीब एक सप्ताह का समय लगेगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के नेतृत्व में विशेष अभियान शुरू किया गया है। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने आमजन, स्वयंसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और व्यापार मंडलों से भी अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
अभियान के पहले दिन हरिद्वार के विष्णु घाट पर आईटीसी मिशन सुनहरा कल, श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम और नगर निगम हरिद्वार की ओर से संयुक्त रूप से गंगा स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान घाटों से कूड़ा-कचरा एकत्र करने के साथ घाट की धुलाई और सफाई भी की गई। श्रद्धालुओं, कांवड़ यात्रियों और दुकानदारों को गंगा में प्लास्टिक और कचरा नहीं डालने के लिए जागरूक किया गया।
पहले दिन अभियान के दौरान 92 कूड़ा बैग एकत्र किए गए। एकत्र कचरे को वैज्ञानिक निस्तारण के लिए नगर निगम हरिद्वार को सौंप दिया गया।
वहीं, बाबा बंसी वाले अन्नपूर्णा आश्रम समिति ने पंत दीप पूर्वी घाट पर भी सफाई अभियान चलाया। समिति की ओर से इस घाट पर नियमित रूप से सफाई की जाती है।
प्रशासन का फोकस अब घाटों, सड़कों, कांवड़ मार्गों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से कचरा हटाने के साथ गंगा को प्रदूषण से बचाने पर है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे कूड़ा निर्धारित स्थान पर ही डालें और गंगा में किसी भी प्रकार का कचरा न डालें।



