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लखवाड़ बांध परियोजना में बड़ा हादसा टला: बारिश के बीच पहाड़ी दरकी, जेसीबी चालक ने कूदकर बचाई जान

लखवाड़ बांध परियोजना

उत्तराखंड: की यमुना घाटी में निर्माणाधीन लखवाड़ बहुउद्देशीय बांध परियोजना में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दिखाई दे रहा है कि लगातार हो रही तेज बारिश के बीच परियोजना स्थल पर एक जेसीबी मशीन पहाड़ के बिल्कुल पास मलबा हटाने का कार्य कर रही थी। तभी अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरकने लगा और देखते ही देखते भारी मात्रा में चट्टानें व मलबा नीचे गिरने लगा। स्थिति इतनी भयावह थी कि कुछ ही सेकंड की देरी चालक की जान पर भारी पड़ सकती थी।

कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम

वीडियो के अनुसार, परियोजना स्थल पर लगातार बारिश हो रही थी और पहाड़ के तल पर जेसीबी मशीन कार्यरत थी। अचानक पहाड़ से छोटे-छोटे पत्थर गिरने लगे, जिसके बाद चालक ने खतरे को भांप लिया। उसने तुरंत जेसीबी को पीछे हटाने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही क्षण बाद पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। मलबा तेजी से मशीन की ओर बढ़ता देख चालक ने बिना समय गंवाए जेसीबी से छलांग लगा दी और सुरक्षित स्थान की ओर दौड़ पड़ा। कुछ ही सेकंड बाद पूरा क्षेत्र मलबे से भर गया। राहत की बात यह रही कि चालक समय रहते बाहर निकल गया और उसकी जान बच गई। घटना का वीडियो बना रहा व्यक्ति कार्यदायी एजेंसी के अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त करता सुनाई देता है। वीडियो में वह कहता है “रुके रहो, जीएम साहब ने बोला है काम चला कर रखो। ” इसके बाद वह कहता है “अभी जेसीबी हटाई है वो भाग रहा है जेसीबी वाला। इन कथनों के आधार पर सोशल मीडिया पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि खराब मौसम और स्पष्ट खतरे के बावजूद कार्य बंद नहीं किया गया। हालांकि, केवल वायरल वीडियो के आधार पर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।

मौसम विभाग की चेतावनी के बीच जारी था काम

घटना के समय क्षेत्र में लगातार भारी बारिश हो रही थी। मौसम विभाग ने पहले से ही भारी वर्षा और भूस्खलन की आशंका को लेकर हाई अलर्ट जारी किया था। जिला प्रशासन की ओर से भी संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बरतने और अनावश्यक गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई थी। ऐसे में परियोजना स्थल पर कार्य जारी रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के दौरान पहाड़ों की मिट्टी और चट्टानें कमजोर हो जाती हैं, जिससे अचानक भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

कार्यदायी एजेंसी पर उठे सवाल

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर कार्यदायी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि:
खराब मौसम में कार्य रोकना चाहिए था। पहाड़ के बिल्कुल नीचे भारी मशीनें संचालित करना जोखिमपूर्ण था कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए थी। यदि चालक समय पर नहीं कूदता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच या पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।

परियोजना की कार्यदायी एजेंसी एलएंडटी (Larsen & Toubro ) के महाप्रबंधक ए.पी. सिंह ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बांध स्थल पर जेसीबी के माध्यम से मलबा हटाने का कार्य नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। कंपनी कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।सभी कार्य निर्धारित सुरक्षा मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कराए जाते हैं। कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा निर्देश और प्रशिक्षण दिए जाते हैं।
कंपनी ने यह भी कहा कि कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार

मानसून के दौरान लगातार बारिश से चट्टानों में दरारें बढ़ जाती हैं। मिट्टी पानी से संतृप्त होकर अपनी पकड़ खो देती है पहाड़ों से अचानक बोल्डर और मलबा गिरने की संभावना बढ़ जाती है। निर्माण स्थलों पर भारी मशीनों का संचालन अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है। इसी कारण ऐसे क्षेत्रों में मौसम की निगरानी, ढलानों का निरीक्षण, और खतरा बढ़ने पर कार्य रोकना महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय माने जाते हैं।

घटना में किसी के घायल होने या जान-माल के नुकसान की आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है। वायरल वीडियो ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों, विशेषकर मानसून के दौरान कार्य संचालन, को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि चालक कुछ सेकंड भी देर करता, तो यह घटना एक बड़े हादसे में बदल सकती थी। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग या प्रशासन इस घटना की जांच करता है या नहीं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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Author: uttarakhandtime

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