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एम्स ऋषिकेश में उत्तराखंड के मरीजों के लिए बड़ी सुविधा, इलाज की प्रक्रिया होगी आसान 

ऋषिकेश-एम्स

ऋषिकेश: उत्तराखंड के मरीजों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में इलाज कराने पहुंचने वाले राज्य के मरीजों को ओपीडी पंजीकरण (पर्चा बनवाने) के लिए लंबी लाइनों में ज्यादा समय नहीं बिताना पड़ेगा। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एम्स ऋषिकेश में उत्तराखंड के निवासियों के लिए अलग ओपीडी पर्चा काउंटर शुरू किया गया है।

स्थानीय विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने सोमवार को एम्स परिसर में इस विशेष काउंटर का उद्घाटन किया। इस दौरान एम्स ऋषिकेश की निदेशक प्रोफेसर मीनू सिंह , वरिष्ठ चिकित्सक, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

स्थानीय मरीजों की परेशानी को देखते हुए लिया गया फैसला

एम्स ऋषिकेश में प्रतिदिन उत्तराखंड के अलावा देश के कई अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में मरीजों की भारी संख्या के कारण ओपीडी पंजीकरण काउंटरों पर अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं। इसका सबसे अधिक असर बुजुर्ग मरीजों, गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों और दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों पर पड़ता था। प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि लंबे समय से स्थानीय लोगों की ओर से यह मांग उठाई जा रही थी कि उत्तराखंड के मरीजों के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए। इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने एम्स प्रशासन से अलग ओपीडी काउंटर शुरू करने का अनुरोध किया था, जिसे अब लागू कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से मरीजों को पर्चा बनवाने में कम समय लगेगा और वे जल्दी डॉक्टर से परामर्श ले सकेंगे। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली भी अधिक व्यवस्थित होगी।

जन औषधि केंद्र पर भी मिलेगी विशेष सुविधा

पूर्व मंत्री ने बताया कि मरीजों की सुविधा केवल ओपीडी तक सीमित नहीं रहेगी। जल्द ही एम्स परिसर के जन औषधि केंद्र में भी उत्तराखंड के मरीजों के लिए अलग काउंटर शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।इस पहल का उद्देश्य दवा लेने के दौरान होने वाली भीड़ को कम करना और मरीजों को आसानी से आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराना है। खासतौर पर दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को इससे काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
एम्स ऋषिकेश उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। यहां उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और अन्य राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं अस्पताल में प्रतिदिन हजारों मरीज ओपीडी सेवाओं का लाभ लेते हैं। गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, किडनी रोग, ट्रॉमा और अन्य सुपर स्पेशियलिटी उपचार के लिए भी बड़ी संख्या में मरीज यहां आते हैं।

200 एकड़ अतिरिक्त भूमि से होगा विस्तार

एम्स ऋषिकेश के विस्तार को लेकर प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल के लिए करीब  200 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव  विचाराधीन है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त भूमि मिलने के बाद—

* अस्पताल में नए भवनों का निर्माण किया जा सकेगा।
* बेड क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।
* नई चिकित्सा सुविधाएं शुरू होंगी।
* आधुनिक उपकरणों और तकनीक का विस्तार होगा।
* मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी।

उन्होंने कहा कि एम्स का विस्तार केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही हैं। राज्य के कई दूरस्थ इलाकों से मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में एम्स ऋषिकेश जैसे संस्थान लोगों के लिए बड़ी उम्मीद हैं। राज्य सरकार लगातार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, आधुनिक जांच सुविधाएं और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के साथ एम्स की भूमिका और महत्वपूर्ण होती जा रही है।

नई ओपीडी काउंटर व्यवस्था को मरीजों और स्थानीय लोगों ने सकारात्मक कदम बताया है। लोगों का कहना है कि इससे खासकर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। पहले पंजीकरण के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था, जिससे मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को परेशानी होती थी। अब अलग काउंटर बनने से प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
एम्स प्रशासन का लक्ष्य मरीजों को अधिक सुविधाजनक और तेज स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए अन्य व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा सकता है। ओपीडी पर्चा काउंटर की यह पहल भले ही छोटी लग रही हो, लेकिन मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि एम्स विस्तार योजना भी आगे बढ़ती है तो ऋषिकेश स्थित यह संस्थान आने वाले वर्षों में और बड़े चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

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Author: uttarakhandtime

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