दून जिला पंचायत अध्यक्ष की जीत इस बार कई बिंदुओं के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भाजपा शासित प्रदेश में राजधानी की सीट विपक्ष के खाते में जाने के साथ ही 30 साल बाद इस सीट की दिशा भी बदली है। देहरादून जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर राज्य बनने के बाद पहली परवादून की महिला कुर्सी पर बैठेगी। इससे पहले यहां जौनसार-बावर क्षेत्र से ही अध्यक्ष रहे हैं।
जौनसार-बावर उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल का एक पहाड़ी क्षेत्र है। यह दून के उत्तर-पश्चिम में जहां हिमाचल प्रदेश की सीमा पर से लगा है दूसरी तरफ उत्तरकाशी-टिहरी से लगा है। दून जिले का यह इलाका राजनीतिक लिहाज से पछवादून भी कहा जाता है तो दूसरी तरफ डोईवाला क्षेत्र का इलाका परवादून कहा जाता है। देहरादून जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर 1996 में रामशरण नौटियाल जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे।
उस समय सीट को जिला परिषद कहा जाता था। इसके बाद 2000 में राज्य अस्तित्व में आया करीब एक साल बाद चुनाव हुए। इस चुनाव में विधायक प्रीतम सिंह के भाई चमन सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बने। उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। जिसके बाद चुनाव थोड़ा देरी से हुए तो 2008 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी मधु चौहान ने जीत दर्ज की। उसके बाद 2013 में दोबारा चमन सिंह ने जीत दर्ज की और 2019 में हुए चुनाव में फिर मधु चौहान जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर बैठी। ये तीनों ही जौनसार बावर क्षेत्र से हैं। इस बार जब चुनाव हुआ तो कांग्रेस ने डोईवाला क्षेत्र की सुखविंदर को अध्यक्ष बनाया और वह जीत गई।
इस बार उपाध्यक्ष पर काबिज हुए अभिषेक
भले ही इस बार जौनसार-बावर क्षेत्र से जिला पंचायत अध्यक्ष न जीते हो पर उपाध्यक्ष पर उसी क्षेत्र के अभिषेक सिंह ने जीत दर्ज की है। वह विधायक प्रीतम सिंह के पुत्र हैं और उन्होंने पहली बार यह चुनाव लड़ा है।
तीसरी बार अध्यक्ष बनने से चूकीं मधु
मधु चौहान पूर्व में दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। इस बार फिर भाजपा ने उन पर विश्वास जताया और उनको जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मैदान में उतारा था, लेकिन वह इस बार चुनाव नहीं जीत पाई। जिस कारण वह तीसरी बार देहरादून जिलाध्यक्ष बनने से चूक गईं।



