देहरादून। उत्तराखंड में आयुष शिक्षा को लेकर एक अहम पहल हुई है। प्रदेश के सभी आयुष कॉलेज अब उत्तराखंड आयुष विश्वविद्यालय से जुड़ गए हैं। सोमवार को विभिन्न कॉलेजों के एमडी और प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से मुलाकात की और छात्रहित से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधियों ने मांग की कि परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किए जाएं ताकि छात्रों की पढ़ाई और करियर पर नकारात्मक असर न पड़े। इसके साथ ही कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रयोगशालाओं की व्यवस्था और क्लीनिकल प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने की बात भी रखी गई।
फिलहाल उत्तराखंड में आयुष शिक्षा से जुड़े 17 कॉलेज संचालित हैं, जिनमें हजारों छात्र अध्ययनरत हैं। ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधियों ने कहा कि इन छात्रों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बनाने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय और सरकार दोनों की है।

इस मौके पर उत्तराखंड आयुष परिषद के अध्यक्ष डॉ. किशोर चंदोला ने कहा कि हिमालयी राज्य उत्तराखंड की पहचान योग और आयुर्वेद से जुड़ी है। ऐसे में राज्य को आयुष शिक्षा और चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनाने की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि यदि समयबद्ध परीक्षाएँ, उच्चस्तरीय शोध और रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड आयुष शिक्षा में देश का नेतृत्व कर सकता है।
छात्रों ने उम्मीद जताई कि सरकार और विश्वविद्यालय की सक्रियता से उनका भविष्य सुरक्षित होगा और उन्हें बेहतर शिक्षा व अवसर मिलेंगे।



