खजान दास ने भाषा विभाग का बजट बढ़ाने के दिए निर्देश

खजान दास

प्रदेश के भाषा विभाग के मंत्री खजान दास ने विभागीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की, जिसमें विभाग के कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों से विभागीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी ली और विभिन्न बिंदुओं पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

मंत्री ने कहा कि भाषा विभाग राजभाषा हिंदी के साथ-साथ उत्तराखंड की क्षेत्रीय बोलियों, उर्दू और पंजाबी भाषा के संवर्धन में सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभाग को इन भाषाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अधिक सम्मानित और प्रचलित बनाने के लिए और बेहतर प्रयास करने चाहिए।

युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने पर जोर

खजान दास ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच के अनुरूप विभाग को नवाचार पर विशेष बल देना चाहिए। साथ ही प्रदेश के युवा और बाल साहित्यकारों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए।

बजट बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश

बैठक में मंत्री ने स्पष्ट कहा कि भाषा विभाग के कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए विभागीय बजट बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय ढांचे को मजबूत करने, प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन, भाषा अध्ययन केंद्रों की स्थापना, पुस्तक मेलों के आयोजन और साहित्य ग्राम की स्थापना के लिए विस्तृत बजट प्रस्ताव तैयार किया जाए।

इसके साथ ही बुजुर्ग साहित्यकारों के लिए पेंशन योजना और साहित्य कल्याण कोष को भी प्रस्ताव में शामिल करने को कहा गया।

पौराणिक गायनों के दस्तावेजीकरण पर फोकस

मंत्री ने गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर क्षेत्र में प्रचलित पौराणिक गायनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक लोक गायनों का अभिलेखिकरण और दस्तावेजीकरण समय की आवश्यकता है।

विशेष रूप से जौनसार बावर क्षेत्र की प्राचीन पंडवाणी गायन बाकणा पर चिंता व्यक्त करते हुए मंत्री ने कहा कि यह परंपरा विलुप्ति के कगार पर है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि संबंधित क्षेत्रों में आयोजित मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जाकर स्थलीय निरीक्षण कर इन लोक परंपराओं को संरक्षित किया जाए।

साहित्यकारों के सम्मान का दायरा बढ़ेगा

मंत्री ने कहा कि दीर्घकालीन साहित्यिक योगदान और साहित्य सेवा के लिए दिए जाने वाले दीर्घकालीन साहित्यसेवी सम्मान का दायरा बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक पात्र साहित्यकारों को इसका लाभ मिल सके।

Anjali Rawat
Author: Anjali Rawat

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *