उत्तराखंड में 19 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत होने जा रही है। यात्रा शुरू होने से करीब ढाई सप्ताह पहले ही 10 लाख से अधिक श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण करा चुके हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं में इस बार यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।
सरकार को उम्मीद है कि इस वर्ष चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है और बड़ी संख्या में भक्त देवभूमि पहुंचेंगे।
वैश्विक तनाव के बीच पेट्रोलियम आपूर्ति पर नजर
ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम और सीएनजी आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसका असर चारधाम यात्रा पर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
हालांकि राज्य सरकार ने स्थिति पर पूरी नजर बनाए रखी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद वर्धन लगातार अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं और गैस व पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा की जा रही है।
फिलहाल उत्तराखंड में पेट्रोलियम आपूर्ति पर किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं है। प्रशासन ने आम जनता और श्रद्धालुओं से घबराने की जरूरत न होने की अपील की है।
यात्रा मार्ग पर हर महीने 15 से 16 हजार सिलेंडरों की जरूरत
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के अनुसार, यात्रा के दौरान उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में हर महीने लगभग 15 से 16 हजार एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता होती है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल सीएनजी और पेट्रोलियम की कोई कमी नहीं है और राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से सभी व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
एलपीजी संकट की स्थिति में लकड़ी होगी विकल्प
पर्यटन विभाग ने वन विभाग से अनुरोध किया है कि यात्रा मार्ग पर मौजूद लकड़ी के डिपो और टॉल के माध्यम से रेस्टोरेंट और होटलों को लकड़ी उपलब्ध कराई जाए।इसका उद्देश्य यह है कि यदि एलपीजी की कमी होती है, तो होटल और ढाबा संचालक लकड़ी के माध्यम से अपना व्यवसाय जारी रख सकें और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
यात्रा प्रबंधन के लिए जिलों को करोड़ों की सहायता
चारधाम यात्रा की तैयारियों को मजबूत करने के लिए उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग को 3-3 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, टिहरी और पौड़ी को ऑफलाइन पंजीकरण और यात्रा प्रबंधन के लिए 1-1 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि यात्रा संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में कोई कमी न रहे।
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चारधाम यात्रा से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी
चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। छोटे व्यापारी, होटल व्यवसायी, टैक्सी चालक, ढाबा संचालक और स्थानीय दुकानदार इसी यात्रा सीजन से आने वाले कई महीनों की आय जुटाते हैं।
बीते वर्षों में आपदा और वैश्विक महामारी ने यात्रा को प्रभावित किया था। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का इस बार यात्रा पर कितना असर पड़ता है।



