केदारनाथ : धाम की यात्रा में आस्था के साथ अब पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर भी देखने को मिल रही है। बाबा केदार के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु जहां कठिन पहाड़ी रास्तों पर पैदल यात्रा कर रहे हैं, वहीं कई श्रद्धालु वापसी के दौरान हिमालय क्षेत्र में फैले कचरे को भी अपने साथ नीचे ला रहे हैं।
हीलिंग हिमालयाज फाउंडेशन के ‘कैरी मी बैक’ अभियान के तहत श्रद्धालुओं की भागीदारी से अब तक केदारनाथ से 10 टन से अधिक कचरा नीचे बेस कैंप तक पहुंचाया जा चुका है। वहीं, इस यात्रा सीजन में फाउंडेशन की ओर से केदारनाथ क्षेत्र से 46 टन से अधिक प्लास्टिक और नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा एकत्र किया गया है।
कचरा प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रही MRF
केदारनाथ धाम में स्थापित मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) कचरा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यहां एकत्र किए गए कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाता है और इसके बाद रिसाइक्लिंग के लिए आगे भेजा जाता है।
इस पूरी मुहिम की सबसे खास बात श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी है। ‘कैरी मी बैक’ अभियान के तहत करीब 4 हजार श्रद्धालु इस पहल से जुड़े हैं। इन श्रद्धालुओं ने केदारनाथ से बेस कैंप तक लौटते समय अपने साथ कम से कम एक किलो कचरा वापस लाने की जिम्मेदारी उठाई।
सफाईकर्मियों के साथ श्रद्धालु भी बने भागीदार
केदारनाथ जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में कचरा प्रबंधन लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में ‘कैरी मी बैक’ अभियान इस जिम्मेदारी को केवल सफाईकर्मियों तक सीमित रखने के बजाय श्रद्धालुओं को भी इसका भागीदार बना रहा है।
श्रद्धालुओं की यह पहल न सिर्फ हिमालय को स्वच्छ रखने में मदद कर रही है, बल्कि यात्रा के दौरान पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दे रही है। आस्था और पर्यावरण संरक्षण का यह मेल केदारनाथ यात्रा को एक नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।



