हरिद्वार: 30 जुलाई श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा का गुरुवार से विधिवत शुभारंभ हो गया। धर्मनगरी हरिद्वार में सुबह से ही “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष गूंजते रहे। हर की पैड़ी सहित विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां शिवभक्तों ने गंगाजल भरकर अपने-अपने शिवालयों की ओर प्रस्थान किया।
प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष कांवड़ यात्रा 11 अगस्त तक चलेगी। यात्रा के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पूरे मेला क्षेत्र को 18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। कांवड़ पटरी मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रमुख घाटों, मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बल के करीब 6,000 जवान तैनात किए गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए यात्रा मार्गों पर लगातार पुलिस गश्त की जा रही है। इसके अलावा ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी नेटवर्क और कंट्रोल रूम के माध्यम से पूरे मेले की निगरानी की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।
हरिद्वार की सड़कों पर रंग-बिरंगी कांवड़, भगवा वस्त्र और शिवभक्ति का अनूठा वातावरण देखने को मिला। गंगाजल को भगवान शिव का प्रसाद मानते हुए श्रद्धालु श्रद्धा और उत्साह के साथ अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। आने वाले दिनों में उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों तक कांवड़ यात्रा की आस्था की यह धारा निरंतर जारी रहेगी।
इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव ने श्रद्धालुओं से कांवड़ यात्रा की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का पवित्र समय है और इस दौरान नशा, हुड़दंग या किसी भी प्रकार का उपद्रव शिवभक्ति की भावना के विपरीत है। उन्होंने सभी कांवड़ियों से अनुशासन, संयम और श्रद्धा के साथ यात्रा पूरी करने का आग्रह किया।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, यातायात नियमों का अनुपालन करें और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का सहयोग करें, ताकि कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।



