स्मार्ट मीटर के खिलाफ हल्द्वानी में बड़ा प्रदर्शन: खून से लिखा पत्र, सड़क पर उतरे लोग

खून से लिखा पत्र

हल्द्वानी। स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर उत्तराखंड के हल्द्वानी में विरोध अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को वार्ड-27 के पार्षद रोहित कुमार के नेतृत्व में पार्षदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने स्मार्ट मीटरों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बुद्ध पार्क से एसडीएम कोर्ट परिसर तक पैदल मार्च निकालकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने अपने खून से मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्मार्ट मीटर हटाने, बढ़े हुए बिजली बिल माफ करने तथा विवादित बिजली बिलों की वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुन रही है, इसलिए उन्हें यह प्रतीकात्मक कदम उठाना पड़ा।

स्मार्ट मीटर के बाद बढ़े बिजली बिलों का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ गए हैं। उनका कहना है कि कई परिवारों की बिजली खपत पहले जैसी ही है, लेकिन बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। इससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की ओर से बढ़े हुए बिलों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है और उपभोक्ताओं को लगातार भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है।

बुद्ध पार्क से एसडीएम कार्यालय तक निकाली रैली

प्रदर्शन की शुरुआत बुद्ध पार्क से हुई, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हुए। इसके बाद हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए एसडीएम कोर्ट परिसर तक पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान “स्मार्ट मीटर वापस लो”, “जनता का शोषण बंद करो”, “बढ़े हुए बिजली बिल वापस लो” जैसे नारे लगाए गए। कई लोगों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

खून से लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

आंदोलन का सबसे चर्चित पहलू तब सामने आया जब प्रदर्शनकारियों ने अपने खून से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। उनका कहना था कि यह सरकार तक जनता की पीड़ा पहुंचाने का एक प्रतीकात्मक प्रयास है। पत्र में लिखा गया कि स्मार्ट मीटरों के कारण आम जनता आर्थिक संकट झेल रही है और सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर राहत प्रदान करनी चाहिए।

ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें

सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में प्रदर्शनकारियों ने निम्नलिखित मांगें रखीं—

* स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बढ़े हुए बिजली बिलों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।
* जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल असामान्य रूप से बढ़े हैं, उनके अतिरिक्त बिल माफ किए जाएं।
* जांच पूरी होने तक विवादित बिजली बिलों की वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए।
* स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने बिजली मीटर दोबारा लगाए जाएं।
* उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष जांच समिति गठित की जाए।
* जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

जनप्रतिनिधियों ने सरकार को दी चेतावनी

वार्ड-27 के पार्षद रोहित कुमार ने कहा कि स्मार्ट मीटरों के कारण हजारों उपभोक्ता परेशान हैं। यदि सरकार ने समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया तो पूरे शहर में बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उपभोक्ताओं की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और दोष पाए जाने पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

प्रदर्शन में शामिल स्थानीय लोगों का कहना था कि—

* पहले जहां दो से तीन हजार रुपये का बिजली बिल आता था, अब कई मामलों में उससे कहीं अधिक राशि का बिल आ रहा है।
* कई उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग में शिकायत की, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
* सरकार को पहले स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच करानी चाहिए और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और बढ़े हुए बिलों के कारणों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है।

कौन-कौन रहे मौजूद

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रमुख रूप से उपस्थित लोगों में—

* वार्ड-27 के पार्षद रोहित कुमार
* पार्षद हेमंत कुमार मोना
* पार्षद सलीम सैफी
* पार्षद सलमान सिद्दीकी
* पार्षद रईस अहमद गुड्डू
* पार्षद समीर अंसारी
* पार्षद प्रतिनिधि मुकीम सैफी
* नदीम सैफी
* तथा क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि और सैकड़ों स्थानीय नागरिक शामिल रहे।

प्रशासन का रुख

प्रदर्शन के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन प्राप्त किया और उसे मुख्यमंत्री तक भेजने का आश्वासन दिया। फिलहाल प्रशासन या बिजली विभाग की ओर से स्मार्ट मीटर हटाने अथवा बढ़े हुए बिजली बिलों को माफ करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

हालांकि, देश के कई हिस्सों में स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर उपभोक्ताओं ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। बिजली वितरण कंपनियां अक्सर कहती हैं कि बढ़े हुए बिलों के पीछे वास्तविक खपत, पुराने मीटरों की कम रीडिंग, बकाया समायोजन या अन्य तकनीकी कारण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक कारण का निर्धारण जांच के बाद ही संभव होता है।

फिलहाल स्थिति हल्द्वानी में स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध तेज हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं अब सभी की नजर राज्य सरकार और बिजली विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी है।

 

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Author: uttarakhandtime

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