हरिद्वार (Haridwar) में प्रस्तावित कुंभ 2027 की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही हैं। मेला कंट्रोल भवन में आज अखाड़ा परिषद की उच्चस्तरीय बैठक शुरू हो गई है, जिसमें मेलाधिकारी सहित संत समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद हैं।
अब तक पांच अखाड़ों के संत बैठक में पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधियों का इंतजार किया जा रहा है। इस बैठक को कुंभ आयोजन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की विशेष मौजूदगी
बैठक में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी विशेष रूप से उपस्थित हैं। उनकी अगुवाई में कुंभ 2027 के धार्मिक और पारंपरिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।
अखाड़ा परिषद की भूमिका कुंभ मेले में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि अमृत स्नान से लेकर पेशवाई और धर्म ध्वज फहराने जैसी परंपराएं अखाड़ों की सहमति और निर्णय के आधार पर ही तय होती हैं।
अमृत स्नान तिथियों पर मंथन
बैठक का मुख्य एजेंडा कुंभ के अमृत स्नान की तिथियों को अंतिम रूप देना है। अमृत स्नान कुंभ मेले का सबसे महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वोच्च अनुष्ठान माना जाता है। संत समाज के बीच इन तिथियों को लेकर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है, ताकि ज्योतिषीय गणनाओं और परंपराओं के अनुरूप तिथियां तय की जा सकें।
पेशवाई और धर्म ध्वज की परंपरा पर चर्चा
कुंभ मेले की भव्यता का प्रतीक पेशवाई (शाही जुलूस) और धर्म ध्वज फहराने की रस्म भी बैठक के केंद्र में है। पेशवाई के दौरान अखाड़ों के संत-साधु पारंपरिक वेशभूषा और शस्त्रों के साथ नगर भ्रमण करते हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र होता है।
धर्म ध्वज फहराने की रस्म कुंभ आयोजन के औपचारिक आरंभ का संकेत मानी जाती है। ऐसे में इन आयोजनों की तारीख और व्यवस्था को लेकर परिषद और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
प्रशासन और संत समाज के बीच समन्वय
बैठक में मेलाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद हैं, जो कुंभ 2027 को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। सुरक्षा, यातायात, आवास, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी प्रारंभिक चर्चा होने की संभावना है। प्रशासन का प्रयास है कि कुंभ 2027 को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाया जाए।
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निर्णायक चरण में पहुंची तैयारियां
कुंभ 2027 को लेकर यह बैठक आगामी महीनों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। संत समाज और प्रशासन के बीच सहमति बनने के बाद आयोजन की विस्तृत कार्ययोजना सार्वजनिक की जा सकती है।
धर्मनगरी हरिद्वार एक बार फिर विश्वस्तरीय धार्मिक आयोजन की तैयारी में जुट गया है, और आने वाले समय में कुंभ 2027 की तैयारियां और अधिक गति पकड़ने की उम्मीद है।



