उत्तराखंड : की प्रसिद्ध और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण नंदा देवी बड़ी जात यात्रा अपने अंतिम पड़ाव की ओर तेजी से बढ़ रही है। यात्रा के दौरान भक्तों में अगाध आस्था और नंदा के प्रति गहरा भावुक माहौल देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने नम आंखों और पारंपरिक जयकारों के बीच देव डोलियों, छंतोलियों और चौसिंगा खाड़ुओं को वेदनी बुग्याल से अगले पड़ावों और कैलाश की ओर विदा किया। इसी के साथ यह यात्रा अपने 15वें पड़ाव पातरनचौनिया और बगवाबासा पहुंच गई है।
वेदनी कुंड में स्नान और रहस्यमयी रूपकुंड की ओर प्रस्थान
बड़ी जात यात्रा में शामिल दशोली, बंड और ज्वाल्पा की देव डोलियों, छंतोलियों तथा चौसिंगा खाड़ुओं के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने वेदनी बुग्याल स्थित पवित्र वेदनी कुंड में स्नान किया। इसके बाद वेदनी स्थित नंदा देवी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
कठिन चढ़ाई: आज यानी शनिवार (19 सितंबर) को यह यात्रा रहस्यमयी रूपकुंड होते हुए यात्रा मार्ग के सबसे कठिन रास्तों में शुमार ज्यूरागली को पार करेगी।
अगले पड़ाव: इसके बाद यात्रा अपने 16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंचेगी, जिसके बाद अंतिम पड़ाव होमकुंड पहुंचेगी। यहीं से पूजा-अर्चना के बाद चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश के लिए विदाई होगी।
बधाण की नंदा डोली लौटी वापस
यात्रा के दौरान बधाण की नंदा राजराजेश्वरी डोली 18 सितंबर की सुबह अपने 13वें पड़ाव गौरोलीपातल से वेदनी बुग्याल पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने वेदनी कुंड की परिक्रमा कर पितरों को तर्पण अर्पित किया। इसके बाद दोपहर में वापसी की यात्रा शुरू हुई। यह डोली आली बुग्याल और दिदिना होते हुए देवाल ब्लॉक के बांक गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने इसका भव्य स्वागत किया। यह डोली लोहाजंग और बगड़ीगाड़ होते हुए ल्वाणी गांव की ओर बढ़ रही है।



